सिद्धार्थनगर। जनपद के 38वें स्थापना दिवस के अवसर पर नवगठित सामाजिक संस्था टीम यशोभूमि द्वारा कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि गोरखपुर–फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद सदस्य ध्रुव कुमार त्रिपाठी शामिल हुए। स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में केक काटकर जनपद का जन्मदिन उत्साहपूर्वक मनाया गया, साथ ही कपिलवस्तु की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत पर सार्थक विमर्श भी हुआ।
बुद्ध की जन्मस्थली प्रमाणित करने के लिए आवश्यक है सामूहिक पहल
अपने संबोधन में ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने कहा कि
“यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी हम विश्व स्तर पर यह प्रमाणित नहीं कर सके कि भगवान बुद्ध की जन्मस्थली कपिलवस्तु ही है। जैसे बच्चे का पैतृक घर उसके मूल परिचय का प्रतीक होता है, वैसे ही मायके जाते हुए जन्मे स्थान को जन्मस्थल मान लेना उचित नहीं।”
उन्होंने कहा कि
कपिलवस्तु को बुद्ध की जन्मस्थली के रूप में वैश्विक मान्यता दिलाने के लिए एकजुट सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रयासों की आवश्यकता है।

कपिलवस्तु महोत्सव में सहभागिता कम होने पर चिंता
कपिलवस्तु महोत्सव आयोजन समिति के कोर ग्रुप से जुड़े
डॉ. सच्चिदानंद मिश्रा, चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव, नजीर मलिक एवं साधना श्रीवास्तव सहित वक्ताओं ने कहा कि
पिछले एक दशक से महोत्सव में समाज के प्रबुद्ध वर्ग की सहभागिता कम होती जा रही है, जो सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए चिंताजनक है।
उन्होंने महोत्सव को समावेशी और व्यापक स्वरूप देने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि कपिलवस्तु की पहचान स्थानीय सीमाओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक स्थापित हो सके।
सम्मान समारोह में जिले के गौरवों का हुआ सम्मान
यशोभूमि गौरव सम्मान 2025
- डॉ. सच्चिदानंद मिश्रा (वरिष्ठ चिकित्सक)
- चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव (पूर्व प्रधानाचार्य, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त)
- नजीर मलिक (वरिष्ठ पत्रकार)
- सत्य प्रकाश गुप्त
- साधना श्रीवास्तव (पूर्व जिला समन्वयक, नेहरू युवा केंद्र)
कलम श्री सम्मान
नजीर मलिक, डॉ. गोविंद प्रसाद ओझा, नियाज कपिलवस्तुवी, संघशील झलक, शिव सागर शहर, पंकज सिद्धार्थ, अरुणेश विश्वकर्मा, सलोनी उपाध्याय, गंगेश मिश्रा अनुरागी, सलमान आमिर, विजय कृष्ण नारायण सिंह, शादाब शब्बीरी
यशोभूमि मंच रत्न सम्मान
- राणा प्रताप सिंह
- नितेश पांडेय
यशोभूमि युवा कर्मयोगी सम्मान
- शुभम श्रीवास्तव


कार्यक्रम संचालन एवं विशिष्ट उपस्थितियाँ
कवि सम्मेलन: संचालन नियाज कपिलवस्तुवी
सम्मान समारोह: संचालन नितेश पांडेय
उपस्थित प्रमुख जन:
अजय कसौंधन, शिवदत्त अग्रहिर, नीरज श्रीवास्तव, राजेश मिश्रा, अवधेश यादव, गिरीश चंद्र मिश्रा, हेमंत शुक्ला, पंकज त्रिपाठी, राजेश शर्मा, अभय श्रीवास्तव, इंद्रसेन सिंह, विजय यादव, प्रदीप वर्मा, दीपक मणि त्रिपाठी, सोनू वरुण सहित अनेक गणमान्य व्यक्तित्व।


टीम यशोभूमि ने जताया आभार
कार्यक्रम के अंत में
संस्था के प्रबंधक/अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव ने
सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, कवियों एवं सम्मानितों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया और कपिलवस्तु की गौरवगाथा को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या कपिलवस्तु वास्तव में भगवान बुद्ध की जन्मस्थली है?
उत्तर: ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक प्रमाण कपिलवस्तु को ही बुद्ध की जन्मस्थली होने की ओर संकेत करते हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे पूर्ण रूप से प्रमाणित करने के लिए अभी और ठोस प्रयासों की आवश्यकता है।
प्रश्न 2: कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: सिद्धार्थनगर स्थापना दिवस के अवसर पर कपिलवस्तु की ऐतिहासिक विरासत को पुनः केंद्र में लाना, बुद्ध की जन्मस्थली की प्रमाणिकता स्थापित करने पर जोर देना और जिले के सम्मानित व्यक्तित्वों को सराहना प्रदान करना इसका मुख्य उद्देश्य था।
प्रश्न 3: टीम यशोभूमि क्या है और यह क्या कार्य करती है?
उत्तर: टीम यशोभूमि सिद्धार्थनगर आधारित सामाजिक संस्था है जो सांस्कृतिक विरासत, साहित्य, कला, इतिहास और कपिलवस्तु की पहचान से जुड़े विषयों पर कार्यक्रम आयोजित करती है तथा सामाजिक सहभागिता सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखती है।
प्रश्न 4: कपिलवस्तु महोत्सव को लेकर किस बात पर चिंता जताई गई?
उत्तर: वक्ताओं ने चिंता जताई कि पिछले कुछ वर्षों से महोत्सव में प्रबुद्ध वर्ग, कोर ग्रुप और समाज की सक्रिय भागीदारी कम हो रही है, जिससे आयोजन सीमित दायरे में सिमटता जा रहा है। इसीलिए इसे अधिक समावेशी और जनभागीदारी आधारित बनाने की आवश्यकता है।
प्रश्न 5: कपिलवस्तु की पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए क्या आवश्यक है?
उत्तर: शोधकर्ताओं, समाज, प्रशासन, इतिहासकारों और सांस्कृतिक संगठनों द्वारा समन्वित एवं दीर्घकालिक प्रयास — ताकि प्रमाणिकता को मजबूत करते हुए कपिलवस्तु की पहचान को विश्व स्तर पर स्थापित किया जा सके।

Conclusion — कपिलवस्तु की पहचान का प्रश्न सिर्फ इतिहास नहीं, स्वाभिमान का मुद्दा
स्थापना दिवस पर उठी यह आवाज बताती है कि
कपिलवस्तु को बुद्ध की जन्मस्थली प्रमाणित करने की पहल तभी सफल होगी, जब समाज, प्रशासन, शोधकर्ता और सांस्कृतिक संगठन मिलकर ठोस प्रयास करें।
यही सिद्धार्थनगर की अस्मिता और गौरव का भविष्य तय करेगा।

